रंजना मिश्रा

हममें से बहुत से लोग कुछ बनने या पाने का सपना तो देखते हैं, पर उन सपनों को साकार कुछ लोग ही कर पाते हैं। उनकी इस सफलता के पीछे होता है उनका अदम्य साहस, सकारात्मक सोच और दृढ़ विश्वास। जिसकी इच्छाशक्ति जितनी प्रबल होगी, उसके लिए सफलता उतनी ही आसान हो जाएगी। अगर हम कुछ पाने का सपना देखें तो उसे साकार करने का साहस भी हममें होना चाहिए। इस संसार में असंभव कुछ भी नहीं है, केवल इच्छाशक्ति जुटाने की आवश्यकता है। दृढ़ इच्छाशक्ति ही सफलता का मूल मंत्र है। कभी-कभी जीवन में ऐसे क्षण भी आते हैं, जब हमारे सामने कई विकल्प होते हैं और उनमें से हमें किसी एक को चुनना होता है। ऐसी स्थिति में हमें अपने मन को एकाग्र कर खुद ही इसका निर्णय लेना चाहिए। क्रोधित मन किसी भी समस्या का समाधान नहीं कर पाता, बल्कि समस्या को शांत मन से ही सुलझाया जा सकता है।

मैंने अक्सर इस बात का साक्षात्कार किया है कि समस्या कितनी भी बड़ी क्यों न हो, मनुष्य अगर अपनी पूरी क्षमता लगा कर इसके निराकरण के लिए प्रयास करे, तो उस समस्या का हल निकल आता है। लेकिन अधिकतर लोग किसी बड़ी समस्या को देख कर ही घबरा जाते हैं और उसे दूर करने के पहले ही हार मान लेते हैं। जबकि कुछ लोग कठिनाइयों और समस्याओं से घबराए बिना और अधिक मजबूत होकर उन कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करते हैं। इतिहास ऐसे ही लोगों को याद रखता है, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं।

दरअसल, अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर बाधा और बड़ी से बड़ी कठिनाई को पार कर जाना ही सफलता का सूत्र है और इसके लिए कोई भी निर्णय लेने में भी हिचकिचाना नहीं चाहिए, चाहे वह कितना भी असंभव लगे। तभी हम अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। रास्ते में अगर हमारे कदम डगमगाए, यानी अगर हम समस्याओं के आगे कमजोर पड़ गए, तो समस्याएं हमें ही निगल जाएंगी। समस्या हमें समाप्त कर दे, इससे पहले हमें ही समस्या को समाप्त करना होगा, उसे जड़ से मिटाना होगा, ताकि वह अपना सिर न उठा सके। इसके लिए हमें समस्या को समाप्त करने वाले हर कठिन से कठिन निर्णय पर कार्य करने का साहस दिखाना होगा।

यों यह एक देखी और जानी हुई बात है कि कोई भी बड़ा कार्य केवल योजना बनाने से ही पूरा नहीं हो पाता। उसको पूरा करने के लिए मन में उसे पूरा करने के लिए जरूरी निष्ठा और समर्पण होना जरूरी है। सच यह है कि सफलता समर्पण चाहती है, इसलिए इसे पाने के लिए हमें उसके प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होना ही पड़ेगा, अन्यथा बीच में ही हार मान कर बैठ जाएंगे या फिर राह में ही भटक जाएंगे। सफलता के रास्ते में अनेक परीक्षाएं देनी पड़ती हैं। जब तक हम शारीरिक और मानसिक रूप से इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होंगे, तब तक हम न अपने लिए कोई लक्ष्य निर्धारित कर पाते हैं और उसे हासिल कर पाते हैं। किसी अभियान को पूरा करने के लिए बहुत सोच-समझ कर, बुद्धिमत्तापूर्ण और प्रभावी योजनाएं बनाई जाती हैं। अगर योजना और उस अमल का तरीका पूरी तरह से परिपक्व और सही होगा, तभी उस अभियान को पूरा करने के लिए उठाए गए कदम सही होंगे।

हमारे समाज में अक्सर गुणीजनों ने कहा है कि अच्छी योजनाएं असंभव दिखने वाले स्वप्नों को भी साकार कर देती हैं। जो बिना रुके और बिना थके अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता जाता है, उसे एक न एक दिन सफलता प्राप्त होती है, भले ही रास्ते में असफलता ने कई बार उसे हताश करने की कोशिश की हो। बिना हार माने जो केवल अपने लक्ष्य पर नजरें टिकाए रहता है, वह बार-बार असफल होने पर भी हताश नहीं होता, बल्कि फिर से दोगुनी शक्ति और उत्साह से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने लगता है और इतिहास भी ऐसे ही लोगों का गुणगान करता है। अक्सर मुझे सकारात्मक सोच एक ऐसा जरिया लगता रहा है, जिससे स्वप्न जैसी असंभव और कठिन प्रतीत होने वाली योजनाओं को भी साकार किया जा सकता है। जबकि नकारात्मक सोच हमें निराशा से भर देती है, यह हमारी आत्मशक्ति को कमजोर करती है। यह एक प्रकार की संक्रामक बीमारी की तरह है, जिससे ग्रसित व्यक्ति अपने साथ-साथ अपने आसपास के सभी लोगों में निराशावादी दृष्टिकोण को जन्म देता है। इसलिए इससे बचना चाहिए।

हमारा मन चंचल है और इस चंचलता के कारण वह एक जगह स्थिर नहीं रह पाता। बिना मन के किया गया कोई भी कार्य सफलता दिलाने में कामयाब नहीं होता। चंचल मन लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ने में बाधा उत्पन्न करता है। इसलिए मन को पूरी तरह से एकाग्र और व्यवस्थित करने की आवश्यकता है। सफल होने के लिए आवश्यक है कि हमारा मन हमारे प्रयास में पूरा साथ दे। तभी हम अपने लक्ष्य की ओर शीघ्रता से बढ़ पाएंगे। यानी हमें साफ-साफ यह पता होना चाहिए कि हमें क्या प्राप्त करना है!






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