उमाकांत म‍िश्रा

डीएफओ ईशा तिवारी व एसडीओ दीपक कुमार श्रीवास्तव की अगुवाई में गुरुवार को कैटल दस्ते ने खूंखार तेंदुए को कैद करने के लिए पिंजरा लगाया। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम ने आज भी झाड़ियों में कांबिंग की लेकिन तेंदुआ वन विभाग की टीम को हाथ नहीं लग सका।
पुलिस बल के साथ टीम अभी भी निर्दिष्ट स्थल के करीब दस किलोमीटर की परिधि में तेंदुए की खोजबीन करने में जुटी हुई है। ग्रामीणों की मानें तो तेंदुआ और वन विभाग की टीम के बीच अभी भी आंख मिचौली का खेल जारी है।

क्षेत्र के ग्राम सकरौली के मजरा बंगला के निकट यूकेलिप्टस के बाग में किसी दूरदराज के जंगल से भटक कर खूंखार जानवर तेंदुआ आ पहुंचा है। तेंदुए ने बीते मंगलवार कि सुबह पड़ोसी ग्राम हुलासी खेड़ा निवासी अनिल कुमार, कमलू व सर्वेश कुमार सहित आधा दर्जन लोगों को झपट्टा मारकर घायल कर दिया था। सूचना पर पहुंची वन विभाग और पुलिस की टीम ने जंगल में कांबिंग की थी। लेकिन तेंदुआ पकड़ में नहीं आ सका था। मंगलवार की रात भी एसडीएम दिनेश कुमार और क्षेत्राधिकारी आशुतोष ने पुलिस बल के साथ क्षेत्र का चप्पा-चप्पा छाना और झाड़ियों से तेंदुए को निकालने के लिए जेनरेटर के जरिए तेज प्रकाश की व्यवस्था भी की। बावजूद खूंखार जानवर झाड़ियों में ही छुपा रहा।

गुरुवार प्रातः वन विभाग और पुलिस की टीम ने पड़ोसी गांव मल्हपुर चहलहा , छंगन लाल खेड़ा , जामड, धन्ना खेड़ा व गन्ना खेड़ा के आसपास खेतों और झाड़ियों तथा बागों में तेंदुए को ढूंढने की कोशिश की। लेकिन अभी तक टीम को उसकी छाया तक नसीब नहीं हो सकी है। फिलहाल लखनऊ से आए कैटल दस्ते ने जंगल के निकट पिंजरे को स्थापित कर दिया है और करीब दो किलोमीटर की परिधि से कांबिंग के जरिए घेराव कर तेंदुए को दबोचने की कोशिश कर रही है। वन दरोगा पप्पू सिंह यादव ने बताया कि एक रात में तेंदुआ पचास से साठ किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है। हो सकता है कि तेंदुआ इस क्षेत्र से काफी दूर निकल गया हो ।फिर भी तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया है। साथ ही सौ किलोमीटर की परिधि में वन कर्मियों को अलर्ट भी किया गया है।






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