कविता – “ज़िन्दगी की हक़ीक़त”

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जब तक चलेगी ज़िंदगी की सांसे, कहीं प्यार कहीं टकराव मिलेगा । कहीं बनेंगे संबंध अंतर्म न से तो, कहीं आत्मीयता का अभाव मिलेगा । कहीं मिलेगी ज़िंदगी...

कविता

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तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तू मेरे गांव* को गँवार कहता है .. ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है ? तू चुल्लू भर...

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